कोरोना के कारण आखिरी वक्त में मिल भी न पाया पिता ,संदिग्ध ने आइसोलेशन वार्ड से देखा पिता का शव

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दुनिया भर में कोरोना वायरस तेजी से फैल रहा है. वहीं, भारत में कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या अब 85 हो गई और 2 लोगों की मौत भी हो चुकी है. कोरोना के कारण जहां लोग अपनो को खो रहे हैं, वहीं हजारों लोग अपने परिजनों तक पहुंचने के लिए दुनिया के विभिन्न हिस्सों में फंसे हुए हैं. ऐसे में केरल से एक दर्द भरी कहानी सामने आई है.

एक शख्स अपने पिता को देखने के लिए कतर से लौटा था, लेकिन कोरोना वायरस होने के शक के कारण अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सका. केरल के थोडुपुझा के मूल निवासी ने फेसबुक के जरिए अपने दर्द को बयां किया.

शख्स कतर में एक निजी फर्म में काम करता है. उनका परिवार मध्य केरल के थोडुपुझा क्षेत्र के पास अलैकोड गांव में रहता है. शख्स ने लिखा, 7 मार्च को मैंने अपने भाई का मैसेज देखा. उसने तुरंत संपर्क करने को कहा. जैसे ही मैंने उसे कॉल किया मुझे पता चला कि मेरे पिता सोने के दौरान बिस्तर से गिर गए थे, जिस कारण उन्हें गंभीर चोटें आई हैं. उन्हें अलप्पुझा मेडिकल कॉलेज में शिफ्ट किया गया था.

बाद में जब मैंने फोन किया तो मुझे बताया गया कि उन्हें आंतरिक रक्तस्राव यानी इंटर्नल ब्लीडिंग हो रही है. मैंने तुरंत ऑफिस में जानकारी दी. फिर उन लोगों ने केरल के लिए मेरी फ्लाइट बुक कर दी. हालांकि, मैं केरल में फैले कोरोना वायरस की भी मुझे जानकारी थी, इसलिए मैं चिंतित था कि क्या मैं घर जा पाऊंगा. मैं उस रात कोच्चि के लिए निकला.

अस्पताल में पिता से नहीं मिल पाया

शख्स ने लिखा, पहुंचने पर कोरोना वायरस के लिए उनकी स्क्रीनिंग की गई. उसके बाद उन्हें अपने होम टाउन जाने की अनुमित दी गई. बाद में वे कोट्टायम के लिए रवाना हुए. हालांकि, इस दौरान उनका रिश्तेदारों से संपर्क नहीं हो पाया और इस तरह मुझे अस्पताल में अपने पिता से मिलने का मौका मिला.

शख्स ने लिखा, जैसा ही मैं अस्पताल से बाहर आया मुझे खांसी शुरू हो गई और मेरे गले में खुजली महसूस हुई. शुरू में मैंने इसे गंभीरता से नहीं लिया. फिर भी सुरक्षा को देखते हुए मैं कोट्टायम मेडिकल कॉलेज में कोरोना सेल में डॉक्टर से कंसल्ट किया. डॉक्टर ने मुझे बताया कि कतर के कई हिस्से में कोरोना वायरस तेजी से फैल रहा है और मुझे तुरंत आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया.

वार्ड की खिड़की से पिता को ले जाते देखा

आइसोलेशन वार्ड में 9 दिन बिताने के बाद रात में खबर मिली कि उनके पिता को दौड़ा पड़ा और इलाज के दौरान उनका निधन हो गया. पिता और पुत्र दोनों एक ही अस्पताल में थे, लेकिन आइसोलेटेड प्रोटोकॉल के कारण शख्स अपने पिता से नहीं मिल सका. अगले दिन उनके पिता के शव को मेडिकल कॉलेज की मोर्चरी में लाया गया, लेकिन शख्स अपने पिता को आइसोलेशन वार्ड की खिड़की से एंबुलेंस में ले जाते देख पाया.

शख्स ने लिखा, जब पिता के शरीर को लाया गया तो मैं आखिरी बार उन्हें वीडियो कॉल से देखा. अगर मैं कोरोना सेल से संपर्क नहीं किया होता तो मैं अपने पिता को देखने में कामयबा हो जाता. हालांकि, मैंने ये वायरस अपने परिवार और मेरे क्षेत्र के लोगों में नहीं फैलने दिया.

शख्स ने लिखा, दूसरे देश से लौटने वाले लोगों को पास के मेडिकल ऑफिस को सूचित करना चाहिए. यदि इसके लिए कुछ दिन अलग रहते हैं, तो बाकी समय अपने परिवार के साथ रह सकते हैं. आखिर में उसने अपने सैंपल टेस्ट के परिणामों पर आशंका जताई.

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